ग़ज़ल गंगा

Play with words to express Feelings and experiences of life.

रविवार, 22 अप्रैल 2012

ग़ज़ल (चार पल की जिन्दगी)

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ग़ज़ल (चार पल की जिन्दगी) कभी गर्दिशों से दोस्ती कभी गम से याराना हुआ चार पल की जिन्दगी का ऐसे कट जाना हुआ इस आस में बीती उम्...
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सोमवार, 12 मार्च 2012

ग़ज़ल ( अपनी जिंदगी)

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ग़ज़ल ( अपनी जिंदगी) अपनी जिंदगी गुजारी है ख्बाबों के ही सायें में  ख्बाबों  में तो अरमानों के जाने कितने मेले हैं   भुला पायेंगें ...
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बुधवार, 8 जून 2011

ग़ज़ल(ये दुनिया मुस्कराती है)

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ग़ज़ल( ये दुनिया मुस्कराती है) जुदा हो करके के तुमसे अब ,तुम्हारी याद आती है  मेरे दिलबर तेरी सूरत ही मुझको ...
7 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 7 जून 2011

ग़ज़ल(हकीकत)

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ग़ज़ल( हकीकत) नजरें मिला के नजरें फिराना ,ये   हमने अब तक सीखा नहीं हैं बादें भुलाकर कसमें मिटाकर ,वह  कहतें ह...
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ग़ज़ल(जाने पहचाने)

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ग़ज़ल( जाने पहचाने) वह  हर बात को मेरी दबाने लगते हैं जब हकीकत हम उनको समझाने लगते हैं जिस गलती पर हमको बह समझाने लगते ...
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