ग़ज़ल गंगा
Play with words to express Feelings and experiences of life.
सोमवार, 28 मई 2012
ग़ज़ल(ख्वाहिश)
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ग़ज़ल(ख्वाहिश) गर कोई हमसे कहे की रूप कैसा है खुदा का हम यकीकन ये कहेंगे जिस तरह से यार है संग गुजरे कुछ लम्हों की हो ...
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गुरुवार, 24 मई 2012
ग़ज़ल ( दिलासा )
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ग़ज़ल ( दिलासा ) सजाए मोत का तोहफा हमने पा लिया जिनसे ना जाने क्यों बो अब हमसे कफ़न उधर दिलाने की बात करते हैं हुए...
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मंगलवार, 22 मई 2012
ग़ज़ल (खुदगर्जी)
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ग़ज़ल (खुदगर्जी) क्या सच्चा है क्या है झूठा अंतर करना नामुमकिन है हमने खुद को पाया है बस खुदगर्जी के घेरे में एक ज़मीं वख्शी ...
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रविवार, 22 अप्रैल 2012
ग़ज़ल (चार पल की जिन्दगी)
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ग़ज़ल (चार पल की जिन्दगी) कभी गर्दिशों से दोस्ती कभी गम से याराना हुआ चार पल की जिन्दगी का ऐसे कट जाना हुआ इस आस में बीती उम्...
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सोमवार, 12 मार्च 2012
ग़ज़ल ( अपनी जिंदगी)
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ग़ज़ल ( अपनी जिंदगी) अपनी जिंदगी गुजारी है ख्बाबों के ही सायें में ख्बाबों में तो अरमानों के जाने कितने मेले हैं भुला पायेंगें ...
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