ग़ज़ल गंगा
Play with words to express Feelings and experiences of life.
बुधवार, 26 सितंबर 2012
ग़ज़ल(शाम ऐ जिंदगी )
›
ग़ज़ल(शाम ऐ जिंदगी ) आँख से अब नहीं दिख रहा है जहाँ ,आज क्या हो रहा है मेरे संग यहाँ माँ का रोना नहीं अब मैं सुन पा रहा ,कान ...
6 टिप्पणियां:
सोमवार, 17 सितंबर 2012
ग़ज़ल(इक जैसी कहानी)
›
ग़ज़ल(इक जैसी कहानी) हर लम्हा तन्हाई का एहसास मुझकों होता है जबकि दोस्तों के बीच अपनी गुज़री जिंदगानी है क्यों अपने जिस्म ...
11 टिप्पणियां:
गुरुवार, 13 सितंबर 2012
ग़ज़ल (कैसी बेकरारी है)
›
ग़ज़ल (कैसी बेकरारी है) कुछ इस तरह से हमने अपनी जिंदगी गुजारी है न जीने की तमन्ना है न मौत हमको प्यारी है लाचारी का दामन ...
6 टिप्पणियां:
सोमवार, 3 सितंबर 2012
ग़ज़ल(यार का चेहरा मिला)
›
ग़ज़ल(यार का चेहरा मिला) हर सुबह रंगीन अपनी शाम हर मदहोश है वक़्त की रंगीनियों का चल रहा है सिलसिला चार पल की ...
13 टिप्पणियां:
बुधवार, 29 अगस्त 2012
ग़ज़ल ( प्यार से प्यार )
›
ग़ज़ल ( प्यार से प्यार ) जानकर अपना तुम्हे हम हो गए अनजान खुद से दर्द है क्यों अब तलक अपना हमें माना नहीं नहीं है अब ...
8 टिप्पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें