ग़ज़ल गंगा

Play with words to express Feelings and experiences of life.

बुधवार, 26 दिसंबर 2012

ग़ज़ल(सोच)

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 ग़ज़ल(सोच) कैसी सोच अपनी है किधर हम जा रहें यारों गर कोई देखना चाहें बतन मेरे बो आ जाये तिजोरी में भरा धन है मुरझाया सा बचपन है ग़...
21 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 18 दिसंबर 2012

ग़ज़ल (मेरे मालिक मेरे मौला)

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ग़ज़ल (मेरे मालिक मेरे मौला) मेरे मालिक मेरे मौला ये क्या दुनिया बनाई है किसी के पास सब कुछ है मगर बह खा नहीं पाये तेरी दुनियां...
14 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 11 दिसंबर 2012

ग़ज़ल(खेल जिंदगी)

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ग़ज़ल(खेल जिंदगी) दिल के पास हैं लेकिन निगाहों से वह  ओझल हैं क्यों असुओं से भिगोने का है खेल जिंदगी।  जिनके साथ रहना हैं ,नहीं ...
24 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 30 नवंबर 2012

ग़ज़ल(बहुत मुश्किल)

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ग़ज़ल(बहुत मुश्किल) अँधेरे में रहा करता है साया साथ अपने पर बिना जोखिम उजाले में है रह पाना बहुत मुश्किल    ख्वाबों और यादों की ...
20 टिप्‍पणियां:
रविवार, 11 नवंबर 2012

ग़ज़ल (दुआओं का असर)

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ग़ज़ल (दुआओं का असर) हुआ इलाज भी मुश्किल ,नहीं मिलती दबा असली दुआओं का असर होता दुआ से काम लेता हूँ मुझे फुर्सत नहीं यारों कि म...
10 टिप्‍पणियां:
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Madan Mohan Saxena
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