ग़ज़ल गंगा

Play with words to express Feelings and experiences of life.

सोमवार, 15 अप्रैल 2013

ग़ज़ल(दीवारें ही दीवारें)

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ग़ज़ल(दीवारें ही दीवारें) दीवारें ही दीवारें नहीं दीखते अब घर यारों  बड़े शहरों के हालात कैसे आज बदले है.  उलझन आज दिल में है ,कैसी आ...
13 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 25 मार्च 2013

ग़ज़ल(बात अपने दिल की)

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ग़ज़ल(बात अपने दिल की) सोचकर हैरान हैं  हम , क्या हमें अब हो गया है चैन अब दिल को नहीं है ,नींद क्यों  आती नहीं है बादियो...
3 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 8 मार्च 2013

ग़ज़ल(अपने दिल की दास्ताँ )

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ग़ज़ल(अपने दिल की दास्ताँ ) मिली दौलत , मिली शोहरत , मिला है मान उसको क्यों  मौका जानकर अपनी जो बात बदल जाता है . किसी का दर्द ...
31 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2013

ग़ज़ल(दिल भी यार पागल)

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  ग़ज़ल(दिल भी यार पागल) जिसे चाहा उसे छीना , जो पाया है सहेजा है  उम्र बीती है लेने में ,मगर फिर शून्यता क्यों हैं  सभी पाने को आतुर...
18 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 18 फ़रवरी 2013

ग़ज़ल(मेरे हमनसी मेरे हमसफ़र )

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ग़ज़ल(मेरे हमनसी मेरे हमसफ़र ) मेरे हमनसी मेरे हमसफ़र ,तुझे खोजती है मेरी नजर तुम्हें हो ख़बर की न हो ख़बर ,मुझे सिर्फ तेरी तलाश ह...
7 टिप्‍पणियां:
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