ग़ज़ल गंगा

Play with words to express Feelings and experiences of life.

सोमवार, 19 अगस्त 2013

ग़ज़ल (ये कल की बात है)

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ग़ज़ल (ये कल की बात है) उनको तो हमसे प्यार है ये कल की बात है  कायम ये ऐतबार था ये कल की बात है  जब से मिली नज़र तो चलता नहीं है ...
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बुधवार, 10 जुलाई 2013

ग़ज़ल ( स्वार्थ की तालीम )

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ग़ज़ल ( स्वार्थ की तालीम )   प्यार की हर बात से महरूम हो गए आज हम दर्द की खुशबु भी देखो आ रही है फूल  से दर्द का तोहफा मिला...
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बुधवार, 29 मई 2013

ग़ज़ल ( सब कुछ तो ब्यापार हुआ )

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ग़ज़ल ( सब कुछ तो ब्यापार हुआ  )   मेरे जिस टुकड़े को  दो पल की दूरी बहुत सताती थी जीवन के चौथेपन में अब ,बह सात समन्दर पार हुआ   ...
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सोमवार, 15 अप्रैल 2013

ग़ज़ल(दीवारें ही दीवारें)

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ग़ज़ल(दीवारें ही दीवारें) दीवारें ही दीवारें नहीं दीखते अब घर यारों  बड़े शहरों के हालात कैसे आज बदले है.  उलझन आज दिल में है ,कैसी आ...
13 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 25 मार्च 2013

ग़ज़ल(बात अपने दिल की)

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ग़ज़ल(बात अपने दिल की) सोचकर हैरान हैं  हम , क्या हमें अब हो गया है चैन अब दिल को नहीं है ,नींद क्यों  आती नहीं है बादियो...
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