ग़ज़ल गंगा
Play with words to express Feelings and experiences of life.
शुक्रवार, 28 नवंबर 2014
ग़ज़ल (सपनें खूब मचलते देखे)
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सपनीली दुनियाँ मेँ यारों सपनें खूब मचलते देखे रंग बदलती दूनियाँ देखी ,खुद को रंग बदलते देखा सुबिधाभोगी को तो मैनें एक जगह पर...
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सोमवार, 24 नवंबर 2014
ग़ज़ल ( मम्मी तुमको क्या मालूम )
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सुबह सुबह अफ़रा तफ़री में फ़ास्ट फ़ूड दे देती माँ तुम टीचर क्या क्या देती ताने , मम्मी तुमको क्या मालूम क्या क्या रूप बना कर आत...
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सोमवार, 9 दिसंबर 2013
ग़ज़ल (कहने का मतलब)
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ग़ज़ल ( कहने का मतलब ) कहने का मतलब होता था ,अब ये बात पुरानी है जैसा देखा बैसी बातें .जग की अब ये रीत हो रही साझा करने को ना म...
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सोमवार, 4 नवंबर 2013
ग़ज़ल( मुहब्बत के फ़साने )
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ग़ज़ल( मुहब्बत के फ़साने ) नजर फ़ेर ली है खफ़ा हो गया हूँ बिछुड़ कर किसी से जुदा हो गया हूँ मैं किससे करूँ बेबफाई का शिकबा कि खुद र...
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मंगलवार, 8 अक्टूबर 2013
ग़ज़ल (कुर्सी और वोट)
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ग़ज़ल (कुर्सी और वोट) कुर्सी और वोट की खातिर काट काट के सूबे बनते नेताओं के जाने कैसे कैसे , अब ब्यबहार हुए दिल्ली में कोई...
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