ग़ज़ल गंगा

Play with words to express Feelings and experiences of life.

बुधवार, 11 फ़रवरी 2015

ग़ज़ल ( दिल में दर्द जगाता क्यों हैं )

›
गर दबा नहीं है दर्द की तुझ पे  दिल में दर्द जगाता क्यों हैं  जो बीच सफर में साथ छोड़ दे  उन अपनों से मिलबाता क्यों हैं  क्यों भू...
4 टिप्‍पणियां:
रविवार, 28 दिसंबर 2014

ग़ज़ल (पिज्जा बर्गर कोक भा गया नए ज़माने के लोगों को )

›
ग़ज़ल (पिज्जा बर्गर कोक भा गया नए ज़माने के लोगों को ) माता मम्मी अम्मा कहकर बच्चे प्यार जताते थे मम्मी अब तो ममी हो गयीं प्यारे पापा डै...
4 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 28 नवंबर 2014

ग़ज़ल (सपनें खूब मचलते देखे)

›
  सपनीली दुनियाँ मेँ यारों सपनें खूब मचलते देखे रंग बदलती दूनियाँ देखी ,खुद को रंग बदलते देखा सुबिधाभोगी को तो मैनें एक जगह पर...
2 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 24 नवंबर 2014

ग़ज़ल ( मम्मी तुमको क्या मालूम )

›
सुबह सुबह अफ़रा तफ़री में फ़ास्ट फ़ूड दे देती माँ तुम  टीचर क्या क्या देती ताने , मम्मी तुमको क्या मालूम  क्या क्या रूप बना कर आत...
1 टिप्पणी:
सोमवार, 9 दिसंबर 2013

ग़ज़ल (कहने का मतलब)

›
ग़ज़ल ( कहने का मतलब ) कहने का मतलब होता था ,अब ये बात पुरानी  है जैसा देखा बैसी बातें  .जग की अब ये रीत हो रही   साझा करने को ना म...
1 टिप्पणी:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

Play with words for expressing Feelings.out Me

मेरी फ़ोटो
Madan Mohan Saxena
Gazalkar
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.