ग़ज़ल गंगा
Play with words to express Feelings and experiences of life.
मंगलवार, 9 जून 2015
कुछ शेर
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कुछ शेर उसे हम दोस्त क्या मानें दिखे मुश्किल में मुश्किल से मुसीबत में भी अपना हो उसी को दोस्त मानेगें जो दिल को तोड़ ही डाले उ...
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गुरुवार, 28 मई 2015
ग़ज़ल(ये किसकी दुआ है )
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ग़ज़ल(ये किसकी दुआ है ) मैं रोता भला था , हँसाया मुझे क्यों शरारत है किसकी , ये किसकी दुआ है मुझे यार नफ़रत से डर ना लगा है प्यार की च...
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सोमवार, 18 मई 2015
ग़ज़ल (बचपन यार अच्छा था)
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ग़ज़ल (बचपन यार अच्छा था) जब हाथों हाथ लेते थे अपने भी पराये भी बचपन यार अच्छा था हँसता मुस्कराता था बारीकी जमाने की, समझने में...
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मंगलवार, 28 अप्रैल 2015
ग़ज़ल (अजब गजब सँसार )
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रिश्तें नातें प्यार बफ़ा से सबको अब इन्कार हुआ बंगला ,गाड़ी ,बैंक तिजोरी इनसे सबको प्यार हुआ जिनकी ज़िम्मेदारी घर की वह सात...
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बुधवार, 11 फ़रवरी 2015
ग़ज़ल ( दिल में दर्द जगाता क्यों हैं )
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गर दबा नहीं है दर्द की तुझ पे दिल में दर्द जगाता क्यों हैं जो बीच सफर में साथ छोड़ दे उन अपनों से मिलबाता क्यों हैं क्यों भू...
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