ग़ज़ल गंगा
Play with words to express Feelings and experiences of life.
सोमवार, 26 अक्टूबर 2015
ग़ज़ल(खुदा जैसा ही वह होगा)
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वक़्त की साजिश समझ कर, सब्र करना सीखियें दर्द से ग़मगीन वक़्त यूँ ही गुजर जाता है जीने का नजरिया तो, मालूम है उसी को ...
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शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2015
ग़ज़ल (दर्दे दिल)
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ग़ज़ल ( दर्दे दिल ) रंगत इश्क की क्या है ,ये वह ही जान सकता है दिल से दिल मिलाने की ,जुर्रत जो किया होगा तन्हाई में जीना त...
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मंगलवार, 13 अक्टूबर 2015
ग़ज़ल (अब समाचार ब्यापार हो गए )
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किसकी बातें सच्ची जानें अब समाचार ब्यापार हो गए पैसा जब से हाथ से फिसला दूर नाते रिश्ते दार हो गए डिजिटल डिजिटल सुना है जबसे अ...
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बुधवार, 30 सितंबर 2015
ग़ज़ल(आगमन नए दौर का)
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ग़ज़ल(आगमन नए दौर का) आगमन नए दौर का आप जिसको कह रहे वो सेक्स की रंगीनियों की पैर में जंजीर है सुन चुकेहैं बहुत किस्से वीरत...
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मंगलवार, 22 सितंबर 2015
ग़ज़ल ( कैसे कैसे रँग)
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ग़ज़ल ( कैसे कैसे रँग ) कभी अपनों से अनबन है कभी गैरों से अपनापन दिखाए कैसे कैसे रँग मुझे अब आज जीबन है ना रिश्तों की ही कीमत है ...
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