ग़ज़ल गंगा
Play with words to express Feelings and experiences of life.
शुक्रवार, 13 नवंबर 2015
ग़ज़ल(बहुत मुश्किल )
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ग़ज़ल(बहुत मुश्किल ) अँधेरे में रहा करता है साया साथ अपने पर बिना जोखिम उजाले में है रह पाना बहुत मुश्किल ख्बाबो और य...
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मंगलवार, 3 नवंबर 2015
मेरी ग़ज़ल जय विजय ,बर्ष -२ , अंक २ ,नवम्बर २०१५ में
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प्रिय मित्रों मुझे बताते हुए बहुत ख़ुशी हो रही है कि मेरी ग़ज़ल जय विजय ,बर्ष -२ , अंक २ ,नवम्बर २०१५ में प्रकाशित हुयी है . आप...
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सोमवार, 2 नवंबर 2015
दो शेर
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दो शेर प्रथम : अब सन्नाटे के घेरे में जरुरत भर ही आबाजें घर में ,दिल की बात दिल में ही यारों अब दबातें हैं दूसरा ...
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सोमवार, 26 अक्टूबर 2015
ग़ज़ल(खुदा जैसा ही वह होगा)
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वक़्त की साजिश समझ कर, सब्र करना सीखियें दर्द से ग़मगीन वक़्त यूँ ही गुजर जाता है जीने का नजरिया तो, मालूम है उसी को ...
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शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2015
ग़ज़ल (दर्दे दिल)
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ग़ज़ल ( दर्दे दिल ) रंगत इश्क की क्या है ,ये वह ही जान सकता है दिल से दिल मिलाने की ,जुर्रत जो किया होगा तन्हाई में जीना त...
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