ग़ज़ल गंगा

Play with words to express Feelings and experiences of life.

गुरुवार, 26 मई 2016

ग़ज़ल (किसी के हाल पर यारों,कौन कब आसूँ बहाता है)

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दिल के पास है लेकिन निगाहों से जो ओझल है ख्बाबों में अक्सर वह हमारे पास आती है अपनों संग समय गुजरे इससे बेहतर क्या होगा कोई तन्हा रहना नह...
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मंगलवार, 17 मई 2016

एक शेर

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एक शेर  नहीं उम्मीद रक्खो अब किसी से भी ज़माने में  हुए मशगूल अपने जब अपनों को गिराने में मदन मोहन सक्सेना
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बुधवार, 4 मई 2016

ग़ज़ल (सब सिस्टम का रोना रोते)

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          सुबह हुयी और बोर हो गए जीवन में अब सार नहीं है रिश्तें अपना मूल्य खो रहे अपनों में वो प्यार नहीं ह...
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बुधवार, 23 मार्च 2016

मेरी ग़ज़ल जय विजय ,बर्ष -२ , अंक ६ ,मार्च २०१६ में

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प्रिय मित्रों मुझे बताते हुए बहुत ख़ुशी हो रही है कि मेरी ग़ज़ल जय विजय ,बर्ष -२ , अंक ६  , मार्च  २०१६  में प्रकाशित हुयी है . ...
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गुरुवार, 10 मार्च 2016

ग़ज़ल(हकीकत)

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नजरें मिला के नजरें फिराना ,ये   हमने अब तक सीखा नहीं हैं बादें भुलाकर कसमें मिटाकर ,वह  कहतें है हमसे मुहब्बत यही हैं ...
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