ग़ज़ल गंगा

Play with words to express Feelings and experiences of life.

शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2017

दिल में दर्द जगाता क्यों हैं

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गर दबा नहीं है दर्द की तुझ पे दिल में दर्द जगाता क्यों हैं जो बीच सफर में साथ छोड़ दे उन अपनों से मिलबाता क्यों हैं क्यों भूखा नंगा ब...
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सोमवार, 26 दिसंबर 2016

मैं रचनाएँ और साहित्यपीडिया भाग १

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मैं रचनाएँ और साहित्यपीडिया भाग १
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शुक्रवार, 23 दिसंबर 2016

दिल में दर्द जगाता क्यों हैं

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गर दबा नहीं है दर्द की तुझ पे दिल में दर्द जगाता क्यों हैं जो बीच सफर में साथ छोड़ दे उन अपनों से मिलबाता क्यों हैं क्यों भूखा नंगा ब्याकु...
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मंगलवार, 13 दिसंबर 2016

मेरी ग़ज़ल जय विजय ,बर्ष -३ अंक ३ ,दिसम्बर २०१६ में प्रकाशित

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प्रिय मित्रों मुझे बताते हुए बहुत ख़ुशी हो रही है कि मेरी ग़ज़ल जय विजय , बर्ष -३  , अंक ३   ,दिसम्बर  २०१६ में प्रकाशित ह...
बुधवार, 23 नवंबर 2016

मैं गज़लें और साहित्यपीडिया

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 मैं गज़लें और साहित्यपीडिया  मदन मोहन सक्सेना
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