ग़ज़ल गंगा
Play with words to express Feelings and experiences of life.
सोमवार, 14 अगस्त 2017
ग़ज़ल (बोलेंगे जो भी हमसे बह ,हम ऐतवार कर लेगें )
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ग़ज़ल (बोलेंगे जो भी हमसे बह ,हम ऐतवार कर लेगें ) बोलेंगे जो भी हमसे बह ,हम ऐतवार कर लेगें जो कुछ भी उनको प्यारा है ,हम उनसे प्यार कर लेगे...
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मंगलवार, 16 मई 2017
ग़ज़ल(दुनियाँ में जिधर देखो हज़ारों रास्ते दीखते )
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किसको आज फुर्सत है किसी की बात सुनने की अपने ख्बाबों और ख़यालों में सभी मशगूल दिखतें हैं सबक क्या क्या सिखाता है जीबन का सफ़र यारों मुश्कि...
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बुधवार, 12 अप्रैल 2017
इस आस में बीती उम्र कोई हमें अपना कहे
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कभी गर्दिशों से दोस्ती कभी गम से याराना हुआ चार पल की जिन्दगी का ऐसे कट जाना हुआ इस आस में बीती उम्र कोई हमें अपना कहे अब आज के इस दौर ...
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शुक्रवार, 10 मार्च 2017
ग़ज़ल (चलो हम भी बोले होली है तुम भी बोलो होली है )
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मन से मन भी मिल जाये , तन से तन भी मिल जाये प्रियतम ने प्रिया से आज मन की बात खोली है मौसम आज रंगों का छायी अब खुमारी है चलों सब एक रंग ...
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शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2017
दिल में दर्द जगाता क्यों हैं
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गर दबा नहीं है दर्द की तुझ पे दिल में दर्द जगाता क्यों हैं जो बीच सफर में साथ छोड़ दे उन अपनों से मिलबाता क्यों हैं क्यों भूखा नंगा ब...
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