ग़ज़ल गंगा
Play with words to express Feelings and experiences of life.
मंगलवार, 27 मार्च 2018
किसी के हाल पर यारों,कौन कब आसूँ बहाता है
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दिल के पास है लेकिन निगाहों से जो ओझल है ख्बाबों में अक्सर वह हमारे पास आती है अपनों संग समय गुजरे इससे बेहतर क्या होगा कोई तन्हा...
सोमवार, 26 मार्च 2018
अब खुदा बँटने लगा है इस तरह की तूल से
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प्यार की हर बात से महरूम हो गए आज हम दर्द की खुशबु भी देखो आ रही है फूल से दर्द का तोहफा मिला हमको दोस्ती के नाम पर दोस्तों के बीच मे...
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शुक्रवार, 23 मार्च 2018
ग़ज़ल (किस को गैर कहदे हम और किसको मान ले अपना)
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दुनियाँ में जिधर देखो हजारो रास्ते दीखते मंजिल जिनसे मिल जाए वह रास्ते नहीं मिलते किस को गैर कहदे हम और किसको मान ले अपना मिलते ह...
गुरुवार, 5 अक्टूबर 2017
गज़ल (दीवारें ही दीवारें)
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गज़ल (दीवारें ही दीवारें) दीवारें ही दीवारें नहीं दीखते अब घर यारों बड़े शहरों के हालात कैसे आज बदले है. उलझन आज दिल में है कैसी आज...
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मंगलवार, 5 सितंबर 2017
ग़ज़ल (इस आस में बीती उम्र)
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ग़ज़ल ( इस आस में बीती उम्र ) कभी गर्दिशों से दोस्ती कभी गम से याराना हुआ चार पल की जिन्दगी का ऐसे कट जाना हुआ इस आस में बीती उ...
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