ग़ज़ल गंगा
Play with words to express Feelings and experiences of life.
मंगलवार, 8 मई 2018
चार पल की जिंदगी में चाँद सांसो का सफ़र
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प्यार की हर बात से महरूम हो गए आज हम दर्द की खुशबु भी देखो आ रही है फूल से दर्द का तोहफा मिला हमको दोस्ती के नाम पर दोस्तों के बीच...
गुरुवार, 5 अप्रैल 2018
जिसे देखिये चला रहा है सारे तीर अँधेरे में
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क्या सच्चा है क्या है झूठा अंतर करना नामुमकिन है. हमने खुद को पाया है बस खुदगर्जी के घेरे में .. एक जमी वख्शी...
3 टिप्पणियां:
मंगलवार, 27 मार्च 2018
किसी के हाल पर यारों,कौन कब आसूँ बहाता है
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दिल के पास है लेकिन निगाहों से जो ओझल है ख्बाबों में अक्सर वह हमारे पास आती है अपनों संग समय गुजरे इससे बेहतर क्या होगा कोई तन्हा...
सोमवार, 26 मार्च 2018
अब खुदा बँटने लगा है इस तरह की तूल से
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प्यार की हर बात से महरूम हो गए आज हम दर्द की खुशबु भी देखो आ रही है फूल से दर्द का तोहफा मिला हमको दोस्ती के नाम पर दोस्तों के बीच मे...
1 टिप्पणी:
शुक्रवार, 23 मार्च 2018
ग़ज़ल (किस को गैर कहदे हम और किसको मान ले अपना)
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दुनियाँ में जिधर देखो हजारो रास्ते दीखते मंजिल जिनसे मिल जाए वह रास्ते नहीं मिलते किस को गैर कहदे हम और किसको मान ले अपना मिलते ह...
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