ग़ज़ल गंगा

Play with words to express Feelings and experiences of life.

शुक्रवार, 3 जनवरी 2020

ग़ज़ल ( वो शख्श मेरा यार था)

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उनको तो हमसे प्यार है ये कल की बात है  कायम ये ऐतबार था ये कल की बात है  जब से मिली नज़र तो चलता नहीं है बस  मुझे दिल पर...
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मंगलवार, 8 मई 2018

चार पल की जिंदगी में चाँद सांसो का सफ़र

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प्यार की हर बात से महरूम हो गए आज हम दर्द की खुशबु भी देखो आ रही है फूल से दर्द का तोहफा मिला हमको दोस्ती के नाम पर दोस्तों के बीच...
गुरुवार, 5 अप्रैल 2018

जिसे देखिये चला रहा है सारे तीर अँधेरे में

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क्या सच्चा है क्या है झूठा अंतर करना नामुमकिन है. हमने खुद को पाया है बस खुदगर्जी के घेरे में ..                           एक जमी वख्शी...
3 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 27 मार्च 2018

किसी के हाल पर यारों,कौन कब आसूँ बहाता है

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दिल के पास है लेकिन निगाहों से जो ओझल है ख्बाबों में अक्सर वह हमारे पास आती है अपनों संग समय गुजरे इससे बेहतर क्या होगा कोई तन्हा...
सोमवार, 26 मार्च 2018

अब खुदा बँटने लगा है इस तरह की तूल से

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प्यार की हर बात से महरूम हो गए आज हम दर्द की खुशबु भी देखो आ रही है फूल से दर्द का तोहफा मिला हमको दोस्ती के नाम पर दोस्तों के बीच मे...
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